
अगर आप बिहार में रहते हैं और अपनी जमीन से जुड़ी जानकारी जानना चाहते हैं, तो बिहार भूमि सर्वे आपके लिए बहुत जरूरी विषय है। आज के समय में जमीन से संबंधित रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध हैं, जिससे आम लोगों को काफी सुविधा मिली है। अब खाता-खेसरा, जमाबंदी और भू-नक्शा देखने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
बिहार भूमि सर्वे (Bihar Land Survey) राज्य में भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल, सटीक और पारदर्शी बनाने की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसकी समय-सीमा को अब 2027 तक बढ़ा दिया गया है। इस अभियान का उद्देश्य नागरिकों को अपनी जमीन से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराना और दाखिल-खारिज जैसी प्रक्रियाओं को सरल बनाना है। इसके तहत यदि किसी के पास पुराने भूमि दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं हैं, तो भी स्वघोषणा पत्र सहित लगभग 15 वैकल्पिक दस्तावेज़ों को मान्यता देकर भूमि रिकॉर्ड को अपडेट करने की सुविधा दी जा रही है।
इस लेख में हम आपको बिहार भूमि सर्वे की जानकारी, खाता-खेसरा का मतलब, ऑनलाइन देखने की प्रक्रिया और इससे जुड़े सभी जरूरी पहलुओं को सरल भाषा में समझाएंगे।
बिहार भूमि सर्वे क्या है?
बिहार भूमि सर्वे एक सरकारी प्रक्रिया है, जिसके अंतर्गत राज्य की सभी जमीनों का मापन किया जाता है और उनका रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। इस सर्वे में यह तय किया जाता है कि कौन-सी जमीन किस व्यक्ति के नाम पर है, उसका क्षेत्रफल कितना है और उसका उपयोग किस उद्देश्य के लिए हो रहा है।
बिहार भूमि सर्वे (Bihar Land Survey) राज्य में भूमि रिकॉर्ड को आधुनिक और सटीक रूप से डिजिटल रूप देने की एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है, जिसे बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग (DLRS) द्वारा संचालित किया जा रहा है।
इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य भूमि से जुड़े विवादों को कम करना और नागरिकों को पारदर्शी व विश्वसनीय रिकॉर्ड उपलब्ध कराना है। सर्वे की समय-सीमा को बढ़ाकर वर्ष 2027 तक कर दिया गया है, ताकि राज्य की सभी ज़मीनों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा सके और लोगों को “डिजिटल खतियान” प्रदान किया जा सके।
नागरिक अपनी भूमि से संबंधित विवरण और भू-नक्शा आधिकारिक वेबसाइटों biharbhumi.bihar.gov.in और dlrs.bihar.gov.in पर ऑनलाइन देख सकते हैं।
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बिहार भूमि सर्वे खतियान क्या होता है?

बिहार भूमि सर्वे खतियान (Bihar Land Survey Khatian) राज्य के भूमि रिकॉर्ड से जुड़ा एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है, जिसे अब dlrs.bihar.gov.in और biharbhumi.bihar.gov.in जैसी आधिकारिक वेबसाइटों के जरिए ऑनलाइन देखा और डाउनलोड किया जा सकता है।
इसमें जमीन के मालिक का नाम, खाता संख्या, खेसरा संख्या, जमीन का रकबा और भूमि का प्रकार दर्ज होता है। सरल शब्दों में कहें तो खतियान जमीन का पहचान पत्र होता है। यह दस्तावेज जमीन से जुड़े किसी भी कानूनी काम में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके लिए उपयोगकर्ता को अपना जिला, अंचल और मौजा चुनकर खाता संख्या या नाम के माध्यम से खोज करनी होती है, जिसके बाद ₹10 शुल्क का भुगतान कर डिजिटल खतियान प्राप्त किया जा सकता है।
इस नई व्यवस्था से भूमि से जुड़े विवादों में कमी आती है और रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ती है। नया भूमि सर्वे उन भूमि मालिकों के लिए भी सहायक है जिनके पास पुराने कागजात उपलब्ध नहीं हैं, क्योंकि यह प्रणाली भूमि रिकॉर्ड को अपडेट करने के साथ-साथ उन्हें अधिक आसान और सुलभ बनाती है।
खाता क्या है?
खाता एक नंबर होता है, जो किसी व्यक्ति के नाम पर दर्ज सभी जमीनों को दर्शाता है।
अगर किसी व्यक्ति के पास एक गांव में कई जमीन के टुकड़े हैं, तो वे सभी एक ही खाता नंबर के अंतर्गत आते हैं।
खाता नंबर से यह पता चलता है कि किसी खास व्यक्ति के नाम पर कितनी जमीन दर्ज है।
खेसरा क्या है?
खेसरा जमीन के छोटे-छोटे टुकड़ों को दी जाने वाली संख्या होती है।
एक गांव में हजारों जमीन के टुकड़े हो सकते हैं और हर टुकड़े को अलग पहचान देने के लिए खेसरा नंबर दिया जाता है।
खाता = जमीन का मालिक
खेसरा = जमीन का टुकड़ा
बिहार भूमि सर्वे ऑनलाइन क्यों जरूरी है?
आज के समय में बिहार भूमि सर्वे ऑनलाइन सुविधा आम लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है। इसके कई कारण हैं:
- जमीन का रिकॉर्ड घर बैठे देखा जा सकता है
- समय और पैसे की बचत होती है
- भूमि विवाद की संभावना कम होती है
- दस्तावेज सुरक्षित रहते हैं
- पारदर्शिता बढ़ती है
ऑनलाइन सुविधा से जमीन से जुड़े काम आसान और तेज हो गए हैं।
बिहार भूमि सर्वे से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन देखने और नए आवेदन करने के लिए नागरिक Bihar Bhumi (biharbhumi.bihar.gov.in) और DLRS (dlrs.bihar.gov.in) जैसे आधिकारिक पोर्टलों का उपयोग कर सकते हैं। इन वेबसाइटों के माध्यम से जमाबंदी, भू-अभिलेख और भू-नक्शा देखा जा सकता है, साथ ही नए सर्वेक्षण के लिए स्वघोषणा (प्रपत्र-2) और वंशावली (प्रपत्र-3.1) को ऑनलाइन अपलोड करने की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके लिए संबंधित जिले के लिए जारी किए गए लिंक का उपयोग करना होता है, जिससे भूमि रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ती है और आम नागरिकों की पहुँच आसान होती है।
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प्रमुख पोर्टल और वेबसाइटें
- Bihar Bhumi (भूलेख बिहार): biharbhumi.bihar.gov.in
- DLRS (निदेशालय, भूमि अभिलेख एवं सर्वेक्षण): dlrs.bihar.gov.in
- भू-नक्शा बिहार: bhunaksha.bihar.gov.in (भूमि मानचित्र देखने हेतु)
बिहार भूमि सर्वे की ऑनलाइन सेवाएं
- जमाबंदी / भू-अभिलेख देखना: जिला, अंचल, मौजा और गांव का चयन कर खाता, खेसरा आदि विवरण ऑनलाइन देखा जा सकता है।
- भू-नक्शा: अपनी जमीन का कैडेस्ट्रल मैप ऑनलाइन देखा और डाउनलोड किया जा सकता है।
- नए सर्वेक्षण के लिए आवेदन:
- DLRS पोर्टल पर जाकर “Search your land (New Survey)” या संबंधित विकल्प चुनें।
- स्वघोषणा (प्रपत्र-2) और वंशावली (प्रपत्र-3.1) भरकर PDF बनाएं और अपलोड करें।
- मोबाइल OTP से सत्यापन करें और प्राप्त रेफरेंस आईडी सुरक्षित रखें।
- अन्य सेवाएं: दाखिल-खारिज (म्यूटेशन), लगान भुगतान और अन्य भूमि संबंधी सेवाओं की जानकारी व आवेदन भी ऑनलाइन उपलब्ध हैं।
प्रक्रिया (संक्षेप में)
- DLRS या Bihar Bhumi पोर्टल पर जाएँ।
- “ऑनलाइन सेवाएं” या “भू-अभिलेख” विकल्प चुनें।
- जिला, अंचल और मौजा का चयन करें।
- भूमि विवरण खोजें या नए सर्वेक्षण के लिए आवेदन करें।
- आवश्यक प्रपत्र (स्वघोषणा, वंशावली आदि) अपलोड करें।
यह पूरी व्यवस्था भूमि रिकॉर्ड को आधुनिक, सटीक और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लागू की गई है, ताकि नागरिकों को अपनी जमीन से जुड़ा सही और अद्यतन रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध हो सके।
खाता-खेसरा ऑनलाइन कैसे देखें? (स्टेप बाय स्टेप)

अगर आप अपनी जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन देखना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए आसान चरणों का पालन करें:
स्टेप 1: जिला चुनें
सबसे पहले अपने जिले का चयन करें।
स्टेप 2: अंचल और मौजा चुनें
इसके बाद अपना अंचल (Block) और गांव (मौजा) चुनें।
स्टेप 3: खोजने का तरीका चुनें
आप नीचे दिए गए किसी भी विकल्प से जमीन खोज सकते हैं:
- खाता संख्या से
- खेसरा संख्या से
- खाताधारी के नाम से
- जमाबंदी संख्या से
स्टेप 4: जानकारी भरें
चुने गए विकल्प के अनुसार सही जानकारी दर्ज करें।
स्टेप 5: रिकॉर्ड देखें
अब आपकी जमीन से जुड़ा पूरा विवरण स्क्रीन पर दिखाई देगा। आप चाहें तो इसका प्रिंट भी निकाल सकते हैं।
जमाबंदी पंजी क्या है?
जमाबंदी पंजी जमीन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड होता है। इसमें निम्नलिखित जानकारी होती है:
- जमीन के मालिक का नाम
- जमीन का रकबा
- भूमि का प्रकार
- लगान (Tax) की स्थिति
जमाबंदी रिकॉर्ड से यह पता चलता है कि जमीन सरकारी रिकॉर्ड में किस स्थिति में है।
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भू-नक्शा क्या होता है?
भू-नक्शा जमीन का नक्शा होता है, जिसमें यह दिखाया जाता है कि जमीन की सीमा कहां से कहां तक है।
इससे यह समझने में मदद मिलती है कि आपकी जमीन का आकार और सीमाएं क्या हैं।
भू-नक्शा भूमि विवादों को सुलझाने में भी काफी मददगार होता है।
भूमि सर्वे बिहार से क्या लाभ मिलते हैं?
भूमि सर्वे बिहार से आम नागरिकों को कई फायदे मिलते हैं:
- जमीन का सही और अपडेट रिकॉर्ड
- नाम, रकबा और सीमा की स्पष्ट जानकारी
- खरीद-फरोख्त में आसानी
- सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में सुविधा
- जमीन से जुड़े विवादों में कमी
डिजिटल भूमि रिकॉर्ड ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों की परेशानी काफी कम की है।
बिहार में भूमि सर्वे कब हुआ था?

अगर सवाल उठता है कि बिहार में भूमि सर्वे कब हुआ था, तो बता दें कि बिहार में समय-समय पर अलग-अलग चरणों में भूमि सर्वे किया गया है। पुराने सर्वे रिकॉर्ड को अब नए डिजिटल सर्वे से जोड़ा जा रहा है, ताकि सभी जानकारी अपडेट और सही बनी रहे। सरकार का लक्ष्य है कि हर जमीन का रिकॉर्ड पूरी तरह स्पष्ट और डिजिटल हो।
असल में, बिहार में भूमि सर्वेक्षण का इतिहास अंग्रेजी शासन काल से जुड़ा हुआ है। वर्ष 1890 से 1920 के बीच राज्य में पहला व्यापक भूमि सर्वेक्षण किया गया था, जिसे कैडस्ट्रल सर्वे (खसरा अथवा प्लॉट सर्वे) के नाम से जाना जाता है। इस सर्वे के दौरान जमीन के स्वामित्व, सीमाओं और प्रकृति का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया गया था। इसके बाद लगभग सात दशकों तक कोई बड़ा और समग्र भूमि सर्वे नहीं हुआ।
अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर वर्ष 2013 से राज्यभर में एक नया और व्यापक भूमि सर्वेक्षण अभियान चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य भूमि रिकॉर्ड को आधुनिक बनाना और उन्हें डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध कराना है। इस अभियान को पहले 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे अब बढ़ाकर जुलाई 2026 कर दिया गया है।
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ऐतिहासिक भूमि सर्वे
- 1890–1920: बिहार में पहला बड़ा भूमि सर्वेक्षण इसी अवधि में हुआ, जिसे कैडस्ट्रल सर्वे कहा गया। इसमें भूमि के स्वामित्व, खसरा नंबर और प्लॉट की स्थिति का आकलन किया गया।
- 1950 का दशक: स्वतंत्रता के बाद कुछ जिलों में सीमित स्तर पर सर्वे कराए गए, लेकिन यह राज्यव्यापी नहीं थे।
वर्तमान भूमि सर्वेक्षण अभियान (2013–2026)
- शुरुआत: लगभग 70 वर्षों के अंतराल के बाद, 2013 में बिहार में एक व्यापक भूमि सर्वेक्षण की शुरुआत की गई।
- समय-सीमा: इस अभियान को पहले 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य था, जिसे अब बढ़ाकर जुलाई 2026 कर दिया गया है।
- उद्देश्य: भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण करना, जमीन के मालिकाना हक को स्पष्ट करना और भूमि से जुड़े विवादों को कम करना।
- प्रक्रिया: सर्वे के तहत राजस्व महा-अभियान जैसे विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं, जहाँ गांव-गांव जाकर भूमि से संबंधित जानकारी एकत्र की जा रही है और नए रिकॉर्ड तैयार किए जा रहे हैं।
संक्षेप में, बिहार में आखिरी बड़ा भूमि सर्वे अंग्रेजों के शासनकाल में 1920 के आसपास हुआ था, जबकि वर्तमान में 2013 से एक आधुनिक और विस्तृत सर्वेक्षण अभियान चल रहा है, जिसके 2026 तक पूरा होने की संभावना है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. क्या मोबाइल से जमीन का रिकॉर्ड देख सकते हैं?
A. हाँ, मोबाइल या कंप्यूटर दोनों से देखा जा सकता है।
Q. क्या नाम से जमीन खोजी जा सकती है?
A. हाँ, खाताधारी के नाम से भी खोज संभव है।
Q. क्या यह सुविधा सभी जिलों में उपलब्ध है?
A. जी हाँ, बिहार के लगभग सभी जिलों में यह सुविधा उपलब्ध है।
निष्कर्ष
बिहार भूमि सर्वे और उससे जुड़ी ऑनलाइन सेवाओं ने जमीन से जुड़े कामों को बहुत आसान बना दिया है। अब खाता-खेसरा, जमाबंदी और भू-नक्शा जैसी जानकारी कुछ ही मिनटों में उपलब्ध हो जाती है।
अगर आप जमीन के मालिक हैं या जमीन खरीदने-बेचने की सोच रहे हैं, तो बिहार भूमि सर्वे की जानकारी होना आपके लिए बहुत जरूरी है। यह न सिर्फ आपका समय बचाता है, बल्कि भविष्य में होने वाली परेशानियों से भी बचाता है।


